चिट्ठाजगत

रविवार, 13 सितंबर 2009

बेतुकी बारिस से "बद से बदतर " हुआ बुंदेलखंड

महोबा। बुंदेलखंड में खेती पहले से ही चौपट है। अब इस बेतुकी बारिस ने खरीफ की बची खुची फसल को नष्ट प्राय कर दिया है। पांच वर्षों से सूखा झेल रहे बुंदेलखंड में इस साल बिना वर्षा के ही खरीफ की फसल बोयी गयी थी । फलस्वरूप फसल पहले से ही नाम मात्र की थी। अब जब खरीफ की फसल खेतों में तैयार खड़ी थी तब बेसमय ही एक हफ्ते तक लगातार बारिस हो जाने से खड़ी फसल सड़ गई। जिससे किसानो को जो थोडी बहुत आशा थी वो भी ख़त्म हो गई। हालाँकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिस से रबी की फसल अच्छी हो जायेगी,किन्तु रबी की फसल के लिए खाद-बीज का जुगाड़ तो खरीफ को बेच कर ही होता है। ऐसे में जबकि खरीफ पूरी तरह बर्बाद हो गयी है किसान रबी की मंहगी बुबाई का बंदोबस्त कहाँ से करेगा? यहाँ का लगभग हर किसान पहले से ही कर्जदार है इसलिए अब बैंक भी उन्हें कर्ज नहीं देंगे। अब किसान करें तो क्या? प्रकृति का कहर बुन्देलखंड पर बदस्तूर जारी है। किसानो के धैर्य की सीमा टूट रही है, इसलिए वो कोई भी नकारात्मक कदम भी उठा सकते हैं । यहाँ के क्षेत्रीय संगठन बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी ने सरकार से मांग की है की बुंदेलखंड के किसानों को रबी की फसल की बुबाई के लिए खाद और बीज आदि की व्यवस्था सरकारी स्तर पर करवाई जाये।

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