चिट्ठाजगत

मंगलवार, 24 नवंबर 2009

प्रान्त निर्माण हेतु बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी ने की सम्पूर्ण क्रांति की शुरुआत


बुदेलखंड एकीकृत पार्टी ने महारानी लक्ष्मी बाई की जयंती से बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए सम्पूर्ण क्रांति की शुरुआत की है। पार्टी का मानना है कि बुंदेलखंड राज्य तभी बनेगा जब बुंदेलखंड की जनता इसके लिए सम्पूर्ण क्रांति अख्तियार कर ले । महारानी लक्ष्मी बाई की जयंती पर झाँसी में पार्टी कार्यकर्ताओं को संकल्प दिलाते हुए पार्टी संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि जिस दिन बुंदेलखंड क्षेत्र के हर घर से एक एक आदमी प्रान्त निर्माण कि लडाई से जुड़ कर सड़क पर आ जायेगा उसी दिन प्रान्त का निर्माण हो जायेगा। पार्टी ने महारानी के जन्म दिवस को सम्पूर्ण क्रांति दिवस के रूप में मनाया। पार्टी जनों ने राज्य निर्माण की मांग में ओरछा के निकट बांदा- झाँसी यात्री ट्रेन को आधे घंटे तक रोक कर उग्र क्रांति की सांकेतिक शुरुआत की। संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी ऐसे ही उग्र कार्यक्रम पूरे वर्ष आयोजित करेगी ताकि एक ओर प्रान्त निर्माण का मुद्दा आम आदमी तक पहुँच कर जनांदोलन का रूप ले सके दूसरी ओर सरकारों पर प्रान्त गठन हेतु आवश्यक दबाव बन सके।

शनिवार, 24 अक्टूबर 2009

पृथक बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए सम्पूर्ण क्रांति अभियान

महोबा। पृथक राज्य निर्माण के लिए राजनीतिक दलों और नेताओं का भरोसा छोड़ जनता को खुद आगे आना होगा। बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी इसके लिए रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिन 19 नवंबर से वृहद जन जागरूकता अभियान चलायेगी। इसमें रैली, नुक्कड़ सभा, प्रदर्शन व चक्का जाम जैसे आयोजन किये जायेंगे। राज्य निर्माण की इस मांग को समग्र जनक्रांति के रूप में विकसित करने को जिला मुख्यालयों से गांव स्तर पर चेतना जागरण कार्यक्रम किये जायेंगे। यह जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए दी। उन्होंने कहा कांग्रेस और बसपा बुंदेलखंड राज्य निर्माण के नाम पर खोखली घोषणाएं कर जनता को गुमराह कर रही है। बीते सप्ताह राहुल गांधी से हुई भेंट में उन्होंने वैचारिक तौर पर इसका पुरजोर समर्थन किया। वह अपनी व्यक्तिगत हैसियत का प्रयोग करें तो पृथक राज्य बनना बहुत कठिन नहीं है। इस संबंध में कांग्रेस व बसपा की नियत पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि जनता निहित स्वार्थ की राजनीति करने वाले दलों के भरोसे रही तो पृथक राज्य का सपना साकार होना मुश्किल हो जायेगा। बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी का एक सूत्रीय एजेंडा पृथक राज्य निर्माण का है। आंदोलन को गति देने के लिए रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिन 19 नवंबर से वृहद जन जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है। इसमें जिला मुख्यालयों से गांव स्तर तक चेतना जागरण अभियान चला आम आदमी को इससे जोड़ने की मुहिम चलाई जायेगी। आंदोलन को धार देने के लिये नुक्कड़ सभाएं, रैलियां व प्रदर्शन करने के साथ ही चक्का जाम भी किया जायेगा।

रविवार, 13 सितंबर 2009

बेतुकी बारिस से "बद से बदतर " हुआ बुंदेलखंड

महोबा। बुंदेलखंड में खेती पहले से ही चौपट है। अब इस बेतुकी बारिस ने खरीफ की बची खुची फसल को नष्ट प्राय कर दिया है। पांच वर्षों से सूखा झेल रहे बुंदेलखंड में इस साल बिना वर्षा के ही खरीफ की फसल बोयी गयी थी । फलस्वरूप फसल पहले से ही नाम मात्र की थी। अब जब खरीफ की फसल खेतों में तैयार खड़ी थी तब बेसमय ही एक हफ्ते तक लगातार बारिस हो जाने से खड़ी फसल सड़ गई। जिससे किसानो को जो थोडी बहुत आशा थी वो भी ख़त्म हो गई। हालाँकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिस से रबी की फसल अच्छी हो जायेगी,किन्तु रबी की फसल के लिए खाद-बीज का जुगाड़ तो खरीफ को बेच कर ही होता है। ऐसे में जबकि खरीफ पूरी तरह बर्बाद हो गयी है किसान रबी की मंहगी बुबाई का बंदोबस्त कहाँ से करेगा? यहाँ का लगभग हर किसान पहले से ही कर्जदार है इसलिए अब बैंक भी उन्हें कर्ज नहीं देंगे। अब किसान करें तो क्या? प्रकृति का कहर बुन्देलखंड पर बदस्तूर जारी है। किसानो के धैर्य की सीमा टूट रही है, इसलिए वो कोई भी नकारात्मक कदम भी उठा सकते हैं । यहाँ के क्षेत्रीय संगठन बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी ने सरकार से मांग की है की बुंदेलखंड के किसानों को रबी की फसल की बुबाई के लिए खाद और बीज आदि की व्यवस्था सरकारी स्तर पर करवाई जाये।

बुधवार, 2 सितंबर 2009

बुन्देलखंड के किसानो को सीधी सहायता मिले : संजय पाण्डेय

झाँसी । बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने यहाँ एक कार्यक्रम में कहा कि आज बुन्देलखण्ड के किसानो को सीधी और त्वरित सहायता की जरूरत है। सूखा राहत के नाम पर विभिन्न योजनाओ में जमकर बन्दर बाँट होता है , इसलिए पात्र किसानों को समय से और उचित मात्रा में राहत राशिः नही पहुँच पाती है। केन्द्र सरकार से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को पैकेज न देकर जिलाधिकारियों के माध्यम से किसानों को सीधी सहायता मुहैया करायी जाए। ये पहले ही सिद्ध हो चुका है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसी राहत राशियों का जमकर दुरूपयोग किया है।लिहाजा अब पुनरावृत्ति से बचा जाना चाहिए। दूसरी ओर पाण्डेय ने यह भी कहा कि सूखा राहत मिलने के नियम कानून इतने जटिल होते है कि आम आदमी उन्हें समझ नही पाता है , इसलिए ऐसे में वह जान ही नही पाता है कि उसे कितनी राशि मिलनी चाहिए , फलस्वरूप उसे जो भी मिलता है वह उतने से ही संतुष्टि कर लेता है। अतः राहत देने का फार्मूला आसान हो ।कहा कि बुन्देलखंड में सूखा पीड़ित किसानो द्वारा आत्म हत्याओं का सिलसिला शुरू हो चुका है इसलिए और मौतों का इंतजार न करते हुए सरकार को जल्द ही सहायता की सोचनी चाहिए। श्री पाण्डेय ने कहा कि वैसे तो इस वर्ष पूरे भारत में ही सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है किंतु बुन्देलखंड कि स्तिथि इसलिए हटकर है क्योंकि यहाँ सूखा का पहला साल नही बल्कि पिछले पॉँच वर्षों से यही हालत है। इसलिए सरकार को बुन्देलखंड के किसानो के बारे में प्राथमिकता से सोचना होगा। राहत प्रदान करते समय भी बुन्देलखंड के किसानो को देश के अन्य हिस्सों के किसानो से तुलना न करते हुए विशेष अधिभार दिया जाए।बताया कि बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी यहाँ के किसानों की समस्याओं को लेकर विशाल आन्दोलन शुरू करने जा रही है.

शनिवार, 1 अगस्त 2009

बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण बनना उचित : संजय पाण्डेय

बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने बुंदेलखंड के समुचित विकास के लिए केंद्र द्वारा बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण बनाये जाने के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के विकास के लिए केंद्र से मिलने वाले पैसे का राज्य सरकारे खासा दुरूपयोग करती हैं. इसलिए बुंदेलखंड क्षेत्र का विकास तभी हो सकता है जब यहाँ पर विकास कार्य केंद्र की निगरानी में हो. उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के विकास के प्रति गंभीरता दिखने पर बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के सभी कार्यकर्ता बुंदेलखंड वासियों कि तरफ से राहुल गाँधी तथा केंद्र सरकार का धन्यवाद देते है. संजय पाण्डेय के अनुसार बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण बन जाना बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण बनना उचित : संजय पाण्डेय

बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने बुंदेलखंड के समुचित विकास के लिए केंद्र द्वारा बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण बनाये जाने के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के विकास के लिए केंद्र से मिलने वाले पैसे का राज्य सरकारे खासा दुरूपयोग करती हैं. इसलिए बुंदेलखंड क्षेत्र का विकास तभी हो सकता है जब यहाँ पर विकास कार्य केंद्र की निगरानी में हो. उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के विकास के प्रति गंभीरता दिखने पर बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के सभी कार्यकर्ता बुंदेलखंड वासियों कि तरफ से राहुल गाँधी तथा केंद्र सरकार का धन्यवाद देते है. संजय पाण्डेय के अनुसार बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण बन जाना बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

मंगलवार, 23 जून 2009

बरखा रानी का बेसब्री से इंतजार है बुन्देलखंड के किसानो को


भीषण गर्मी में आमजन, पशु सब अकुला रहे है। गर्मी के तल्ख तेवर कम होने का नाम ही नहीं ले रहे। मानसून के आने के बाद भी वर्षा न होने से किसानों के माथे में चिंता की लकीरें पड़ गई है। सभी यह सोच कर दहल जाते है कि क्या इस वर्ष भी पिछले वर्षो की भांति सूखे की भयावह स्थिति से रूबरू होना पड़ेगा। किसान अब बरखा रानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।
गर्मी इस वर्ष अपने पूरे शबाब पर है। जिससे धरती से जल स्तर खिसकने लगा है। लगातार चार साल से बुंदेलखंड के किसानों को सूखे की मार झेलने के बाद पिछले वर्ष हुई बारिश ने कुछ राहत तो जरूर पहुंचाई थी। मगर इस वर्ष मानसून आने के बाद भी बारिश न होने से किसानों को फिर वहीं पुराने दिन याद आने लगे है। रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिये ग्रामीण अंचलों में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गये है। महोबा जिले के कुलपहाड़ के मां बाघ विराजन मंदिर में पिछले एक सप्ताह से संकीर्तन और पूजा पाठ का दौर चल रहा है। किसान को भी फसल बुवाई के लिये बरखा रानी का इंतजार है। पहले 15 जून से ही आसमान से बारिश होने लगती है। जिससे किसान अपने खेतों में खरीफ फसल की बुवाई करने लगता था। लेकिन इस वर्ष अब तक बारिश न होने से किसानों में चिंता की लकीरें स्पष्ट देखी जा सकती है। सभी मायूस हो बस इंद्रदेव की मेहरबानी का इंतजार कर रहे है। लेकिन वह यह सोचकर दहल जाते है कि क्या इस वर्ष भी पिछले चार वर्षो की भांति सूखे की भयावह स्थिति से रूबरू होना पड़ेगा। सभी किसान अब बरखा रानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।

सोमवार, 22 जून 2009

बुन्देलखंड में भीषण गर्मी से गहराया पेयजल संकट

जैसे जैसे मानसून में देरी हो रही है वैसे वैसे बुन्देलखंड के लोगो और जानवरों की जिजीविषा दम तोड़ रही है। असल में पिछले कई वर्षो के सूखे का सामना कर चुके बुन्देलखंड वासी पुनरावृत्ति नही चाहते है ,किंतु धीरे धीरे हालात वैसे ही बनते जा रहे है। भीषण गर्मी में पेयजल संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है। बुन्देलखंड के सभी जिलों में लोगों का पेयजल के लिये संघर्ष जारी है। सुबह से ही हैण्डपंपों पर पानी भरने वालों की लंबी लाइन लग जाती है और यह सिलसिला देर रात तक अनवरत जारी रहता है। बड़ों की छोड़े बच्चे भी पानी की जुगाड़ के लिये परेशान रहते है। प्रचंड गर्मी में जानवरों को भी अपना गला तर करने के लिये खासी मशक्कत करना पड़ रही है।उमस भरी गर्मी में पेयजल संकट विकराल होता जा रहा है। जलस्तर नीचे खिसकने से कुएं व हैण्डपंप भी धीरे-धीरे साथ छोड़ रहे है। जहां हैण्डपंप सही है वहां पानी भरने वालों की लंबी लाइन लगती है। जो एक बार पानी भर लेता है उसका नंबर फिर घंटों बाद ही आ पाता ।सर्वाधिक परेशानी चित्रकूट के पाठा क्षेत्र, महोबा और जालौन में है।कई जगह ऊंचाई वाले इलाके होने के कारण जल संस्थान की आपूर्ति भी नहीं पहुंच पाती। जिससे यहां के वाशिंदे पूरी तरह हैण्डपंपों पर आश्रित है। हैण्डपंपों में पानी भरने वालों की काफी भीड़ जमा होती है। सुबह 4 बजे से ही लोग हैण्डपंप से पानी भरने लगते है और यह सिलसिला देर रात तक जारी रहता है। जहाँ जल संस्थान द्वारा टैंकरों से जलापूर्ति दी जा रही वहां कुछ प्रभावशाली लोग उसमें अपना कब्जा जमा लेते है। आम लोगों का नंबर आते-आते टैंकर खाली हो जाता है। जिससे पेयजल के लिये खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। कमोवेश यही हाल समूचे बुन्देलखंड का है। आमजन की तो छोड़े जानवरों को भी गला तर करने को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उनके लिये चरही तो बनाई गई मगर उनमें पानी नहीं भरा गया। बेचारे बेजबान जानवर अपनी प्यास बुझाने को दर-दर भटकते रहते है।

बुन्देलखंड में नरेगा नाकाफी,पलायन जारी

यू तो सरकार ने राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना ( नरेगा ) के तहत लोगो को १०० दिन के रोजगार का बदोबस्त किया है पर बुन्देलखंड में यह योजना सफल नही हो पा रही है इसलिए हजारो ग्रामीणों का पलायन प्रतिदिन जारी है। बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय का मानना है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के संचालन में प्रदेश सरकार और उसके कर्मचारी ही सबसे बड़ा रोड़ा बने हुये है।राज्य कर्मचारी फर्जी जॉब कार्ड बना योजना के पैसे का बंदरबांट कर रहे हैं। परन्तु फर्जी रिपोर्ट बना बना कर योजना की सफलता की बात की जा रही हैं।
महोबा जिले के विकासखंड कबरई का गांव पचपहरा ,मुख्यालय से पांच किमी दूर इस गांव में नरेगा का हाल बेहाल है। पिछले वित्तीय वर्ष में काम करने के बाद मजदूरी न मिलने से ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान भी गांव की दशा के लिए ग्राम विकास अधिकारी को जिम्मेदार मानते हैं। ग्राम प्रधान अवधरानी राजपूत बताती है कि पिछले वित्तीय वर्ष में खेत तालाब में मजदूरी करने वाले दर्जनों मजदूरों का आज तक भुगतान नहीं मिल पाया। वह कहती हैं कि ग्राम विकास अधिकारी दयाराम निर्मल महीनों से गांव में नहीं आये। पंचायत भवन पिछले 8 माह से अधूरा पड़ा हुआ है। गांव के राजू कुशवाहा ने बताया कि पिछले वर्ष की मजदूरी में एक हजार रुपया अभी तक नहीं मिला। गांव के ही कालीप्रसाद अनुरागी व ममता यादव ने भी पिछले कार्य की मजदूरी न मिलने का दुखड़ा रोया। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी द्वारा फर्जी जॉब कार्ड बना योजना के पैसे का बंदरबांट किया जा रहा है। प्रधान अवधरानी का आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी कोरी चेक में हस्ताक्षर बनाने का दबाव बना रहे थे। मना करने पर पंचायत में आया 9 लाख रुपया विकास कार्यो की राह देख रहा है। वह कहती है कि ग्रामीण पंचायत सचिव को ही नहीं जानते। महीनों से गांव में खुली बैठक का आयोजन नहीं किया गया। वह कहती है कि कई बार उच्चाधिकारियों से पंचायत अधिकारी को हटवाने की मांग कर चुकी है। मगर अधिकारियों से सांठगांठ होने के कारण आज तक कार्रवाई नहीं की गई। वह कहती है कि सचिव की मनमानी का विरोध करने पर अपनी पहुंच शासन स्तर पर बता धमकी देते है। जिसका सबूत पिछले वित्तीय वर्ष में आया 9 लाख रुपया अभी खर्च होना है। गांव के प्रमोद राजपूत व रामकुमार ने बताया कि मजदूरी का पिछला पैसा ही नहीं मिला तो आगे मजदूरी करने से क्या फायदा।ग्राम विकास अधिकारी दयाराम निर्मल कहते है कि सभी जरूरत मंदों को जॉब कार्ड दिलाया जा रहा है। ग्राम प्रधान अपने हिसाब से काम कराने के लिये अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। यही हाल बुन्देलखंड के हर गाँव का है । संजय पाण्डेय ने कहा कि बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी नरेगा में हो रही धांधली को प्रमुख मुद्दा बनाकर बंदरबांट का खुला विरोध करते हुए जनांदोलन छेड़ेगी।

रविवार, 21 जून 2009

बुन्देलखंड राज्य के लिए एकीकृत पार्टी करेगी संसद पर प्रदर्शन

पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग बुलंद करने के लिए जुलाई में आगामी बजट सत्र के दौरान बुन्देलखण्ड एकीकृत पार्टी के हजारों कार्यकर्त्ता दिल्ली में संसद मार्ग पर जोर दार हल्ला बोलेंगे । धरना प्रदर्शन के उपरांत पार्टी कार्यकर्त्ता प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह को ज्ञापन देकर यूपीए सरकार से मांग करेंगे कि पृथक बुन्देलखंड राज्य की मांग को अमली जमा पहनाने के लिए संसद में इस आशय का अधिनियम पारित करवाने के लिए संवैधानिक कार्यवाही आरम्भ की जाये.

गुरुवार, 7 मई 2009

मेरठ नहीं,बुन्देलखंड का चित्रकूट है प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र

इतिहास की इबारत गवाही देती है कि हिंदुस्तान की आजादी के प्रथम संग्राम की ज्वाला मेरठ की छावनी में भड़की थी। किन्तु इन ऐतिहासिक तथ्यों के पीछे एक सचाई गुम है, वह यह कि आजादी की लड़ाई शुरू करने वाले मेरठ के संग्राम से भी 15 साल पहले बुन्देलखंड की धर्मनगरी चित्रकूट में एक क्रांति का सूत्रपात हुआ था। पवित्र मंदाकिनी के किनारे गोकशी के खिलाफ एकजुट हुई हिंदू-मुस्लिम बिरादरी ने मऊ तहसील में अदालत लगाकर पांच फिरंगी अफसरों को फांसी पर लटका दिया। इसके बाद जब-जब अंग्रेजों या फिर उनके किसी पिछलग्गू ने बुंदेलों की शान में गुस्ताखी का प्रयास किया तो उसका सिर कलम कर दिया गया। इस क्रांति के नायक थे आजादी के प्रथम संग्राम की ज्वाला मेरठ के सीधे-साधे हरबोले। संघर्ष की दास्तां को आगे बढ़ाने में बुर्कानशीं महिलाओं की 'घाघरा पलटन' की भी अहम हिस्सेदारी थी।
आजादी के संघर्ष की पहली मशाल सुलगाने वाले बुन्देलखंड के रणबांकुरे इतिहास के पन्नों में जगह नहीं पा सके, लेकिन उनकी शूरवीरता की तस्दीक फिरंगी अफसर खुद कर गये हैं। अंग्रेज अधिकारियों द्वारा लिखे बांदा गजट में एक ऐसी कहानी दफन है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। गजेटियर के पन्ने पलटने पर मालूम हुआ कि वर्ष 1857 में मेरठ की छावनी में फिरंगियों की फौज के सिपाही मंगल पाण्डेय के विद्रोह से भी 15 साल पहले चित्रकूट में क्रांति की चिंगारी भड़क चुकी थी। दरअसल अतीत के उस दौर में धर्मनगरी की पवित्र मंदाकिनी नदी के किनारे अंग्रेज अफसर गायों का वध कराते थे। गौमांस को बिहार और बंगाल में भेजकर वहां से एवज में रसद और हथियार मंगाये जाते थे। आस्था की प्रतीक मंदाकिनी किनारे एक दूसरी आस्था यानी गोवंश की हत्या से स्थानीय जनता विचलित थी, लेकिन फिरंगियों के खौफ के कारण जुबान बंद थी।
कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए मराठा शासकों और मंदाकिनी पार के 'नया गांव' के चौबे राजाओं से फरियाद लगायी, लेकिन दोनों शासकों ने अंग्रेजों की मुखालफत करने से इंकार कर दिया। गुहार बेकार गयी, नतीजे में सीने के अंदर प्रतिशोध की ज्वाला धधकती रही। इसी दौरान गांव-गांव घूमने वाले हरबोलों ने गौकशी के खिलाफ लोगों को जागृत करते हुए एकजुट करना शुरू किया। फिर वर्ष 1842 के जून महीने की छठी तारीख को वह हुआ, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। हजारों की संख्या में निहत्थे मजदूरों, नौजवानों और बुर्कानशीं महिलाओं ने मऊ तहसील को घेरकर फिरंगियों के सामने बगावत के नारे बुलंद किये। खास बात यह थी कि गौकशी के खिलाफ इस आंदोलन में हिंदू-मुस्लिम बिरादरी की बराबर की भागीदारी थी। तहसील में गोरों के खिलाफ आवाज बुलंद हुई तो बुंदेलों की भुजाएं फड़कने लगीं।देखते-देखते अंग्रेज अफसर बंधक थे, इसके बाद पेड़ के नीचे 'जनता की अदालत' लगी और बाकायदा मुकदमा चलाकर पांच अंग्रेज अफसरों को फांसी पर लटका दिया गया। जनक्रांति की यह ज्वाला मऊ में दफन होने के बजाय राजापुर बाजार पहुंची और अंग्रेज अफसर खदेड़ दिये गये। वक्त की नजाकत देखते हुए मर्का और समगरा के जमींदार भी आंदोलन में कूद पड़े। दो दिन बाद 8 जून को बबेरू बाजार सुलगा तो वहां के थानेदार और तहसीलदार को जान बचाकर भागना पड़ा। जौहरपुर, पैलानी, बीसलपुर, सेमरी से अंग्रेजों को खदेड़ने के साथ ही तिंदवारी तहसील के दफ्तर में क्रांतिकारियों ने सरकारी रिकार्डो को जलाकर तीन हजार रुपये भी लूट लिये। आजादी की ज्वाला भड़कने पर गोरी हुकूमत ने अपने पिट्ठू शासकों को हुक्म जारी करते हुए क्रांतिकारियों को कुचलने के लिए कहा। इस फरमान पर पन्ना नरेश ने एक हजार सिपाही, एक तोप, चार हाथी और पचास बैल भेजे, छतरपुर की रानी व गौरिहार के राजा के साथ ही अजयगढ़ के राजा की फौज भी चित्रकूट के लिए कूच कर चुकी थी। दूसरी ओर बांदा छावनी में दुबके फिरंगी अफसरों ने बांदा नवाब से जान की गुहार लगाते हुए बीवी-बच्चों के साथ पहुंच गये। इधर विद्रोह को दबाने के लिए बांदा-चित्रकूट पहुंची भारतीय राजाओं की फौज के तमाम सिपाही भी आंदोलनकारियों के साथ कदमताल करने लगे। नतीजे में उत्साही क्रांतिकारियों ने 15 जून को बांदा छावनी के प्रभारी मि. काकरेल को पकड़ने के बाद गर्दन को धड़ से अलग कर दिया। इसके बाद आवाम के अंदर से अंग्रेजों का खौफ खत्म करने के लिए कटे सिर को लेकर बांदा की गलियों में घूमे।
काकरेल की हत्या के दो दिन बाद राजापुर, मऊ, बांदा, दरसेंड़ा, तरौहां, बदौसा, बबेरू, पैलानी, सिमौनी, सिहुंडा के बुंदेलों ने युद्ध परिषद का गठन करते हुए बुंदेलखंड को आजाद घोषित कर दिया। बांदा छावनी के अफसर और सिपहसलार-फरमाबरदार बांदा नवाब की पनाह में थे, लिहाजा अंग्रेजों ने मान लिया कि पैर उखड़ चुके हैं। गजेटियर के मुताबिक अंग्रेजों ने एक बारगी जोर लगाया था, लेकिन बिठूर के पेशवा की अगुवाई में मो। सरदार खां, नाजिम, मीर इंशा अल्ला खान की नाकेबंदी के चलते अंग्रेजों की रणनीति धराशायी हो गयी। इस युद्ध में कर्वी के मराठा सरदार के भाई ने मंदाकिनी और यमुना नदी पर अंग्रेजों की सहायता के लिए आने वाली सेना को रोके रखा। इस आंदोलन को धार देने वालों में अगर शीला देवी की घाघरा पलटन का जिक्र नहीं होगा तो बात अधूरी रहेगी। अनपढ़ शीलादेवी ने इस जंग में अहम हिस्सेदारी के लिए महिलाओं को एकजुट किया और फिर पनघटों पर जाकर अन्य महिलाओं को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा करना शुरू किया। खास बात यह थी कि घाघरा पलटन में शामिल ज्यादातर महिलाएं बुर्कानशी और अनपढ़ थी, लेकिन क्रांति की इबारत में उनकी हिस्सेदारी मर्दो से कम नहीं रही।
"बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी" के संयोजक संजय पाण्डेय कहते है कि जब इस क्रांति के बारे में स्वयं अंग्रेज अफसर लिख कर गए हैं तो भारतीय इतिहासकारों ने इन तथ्यों को इतिहास के पन्नों में स्थान क्यों नहीं दिया?सच पूछा जाये तो यह एक वास्तविक जनांदोलन था क्योकि इसमें कोई नेता नहीं था बल्कि आन्दोलनकारी आम जनता ही थी इसलिए इतिहास में स्थान न पाना बुंदेलों के संघर्ष को नजर अंदाज करने के बराबर है.कहा कि बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी प्रचार प्रसार के माध्यम से बुंदेलों की यह वीरता पूर्ण कहानी सारी दुनिया तक पहुचायेगी.

पृथक बुन्देलखंड हेतु अब होगी निर्णायक लडाई

पृथक बुन्देलखंड राज्य की मांग में बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी द्वारा पिछले वर्षों में किए गए संघर्ष का परिणाम यह है कि एक वर्ष से राष्ट्रीय नेताओं की जुबान पर बुन्देलखंड का मुद्दा आने लगा है । एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार यह इस मुद्दे का सेमी फाईनल कहा जा सकता है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे का आना अपने आप में एक सफलता है। किंतु बड़े दलों द्वारा लोक सभा चुनाव में नज़रअंदाज कर देना निश्चित रूप से हमारी असफलता है ,अभी हम इसके लिए उन्हें मजबूर नही कर सके। किंतु अब बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी इस हेतु निर्णायक लडाई लड़ने कि तैयारी में है । हम बहुत जल्द ऐसी स्तिथि पैदा कर देंगे कि केन्द्र और राज्य सरकारों को विवश होकर पृथक बुन्देलखंड राज्य के मामले में संवैधानिक कार्यवाही करनी पड़ेगी।

लफ्फाजी का शिकार हुआ पृथक बुन्देलखंड राज्य का मुद्दा

बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार बुन्देलखंड राज्य निर्माण का मुद्दा राष्ट्रीय नेताओं की लफ्फाजी का शिकार हुआ है। कहा कि बीते वर्ष इस मुद्दे को लेकर जिन नेताओं ने बयानबाजियां की वही नेता एन वक्त पर इस मुद्दे को नज़र अंदाज कर गए । दर असल पिछले साल की शुरुआत में ही मायावती और राहुल गाँधी ने बुन्देलखंड में हुई अपनी अपनी सभाओं में कहा था कि वे पृथक बुन्देलखंड के हिमायती हैं पर लोक सभा चुनाव में न तो कांग्रेस ने और न ही बसपा ने इस मुद्दे को अपने चुनावी घोषणा पत्र में स्थान दिया । हालाँकि बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों ने इस मुद्दे को चुनावी रूप देने की कोशिश की।

गुरुवार, 12 मार्च 2009

लोकसभा प्रत्याशियों की सूची शीघ्र जारी करेगी बुएपा

दिल्ली। बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी बुन्देलखंड की सभी सीटो के साथ साथ दिल्ली की कुछ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने जा रही है,सभी प्रत्याशियों की सूची शीघ्र जारी कर दी जायेगी.पार्टी संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि उनके सभी प्रत्याशी पूरे दम ख़म के साथ पृथक बुंदेलखंड राज्य निर्माण का मुद्दा लेकर चुनाव मैदान में उतरने की पूरी तयारी में हैं. कहा कि आगामी २१ मार्च को हमीरपुर में होने जा रही विशाल रैली में ज्यादातर उम्मीदवारो की घोषणा कर दी जायेगी ।

मंगलवार, 20 जनवरी 2009

बुन्देलखण्ड को प्रात नहीं बनाने के पीछे बड़े राजनैतिक दल

बुन्देलखंड राज्य निर्माण के प्रति दोहरा नजरिया रखने वाले दलों को महंगा साबित होगा।जहां बसपा प्रमुख पृथक बुंदेलखंड राज्य की वकालत करती है वही वे इस आशय का प्रस्ताव केंद्र को भेजने से कतराती है . इसका मतलब उनकी सोच में कोई खोट है. इसी तरह कांग्रेस भी बुन्देलखंड की बात करती हैं पर दूसरा राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती.
वर्षो से हो रही कवायद के फलस्वरूप राज्य निर्माण का कार्य सिफर बना हुआ है। कभी केन्द्र सरकार प्रात निर्माण की गेंद राज्य सरकार के पाले में डाल देती है तो कभी राज्य सरकार इसे किक कर पुन: केन्द्र सरकार के पाले में पहुंचा देती है। ये राजनैतिक दल बुंदेलखण्ड में फैले भ्रष्टाचार, अकाल की स्थिति पर आसू तो बहाते है, लेकिन इन समस्याओं को जड़ से मिटाने के लिए प्रात का निर्माण करने में पीछे हट जाते है। यही बड़ी वजह है कि बुन्देलखण्ड बड़ी कीमत चुकाने के पश्चात भी प्रात के रूप में पहचान हासिल नहीं कर पा रहा है।बुन्देलखण्ड का मसौदा वर्ष 1955 में ही तय कर लिया गया था, लेकिन तत्समय इसको अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका, जिसका खामियाजा आज तक बुन्देलखंडियों को भुगतना पड़ रहा है। कई संगठन प्रात निर्माण के मुद्दे को जीवित बनाये हुए है। प्रात निर्माण के लिए बुन्देलखण्ड एकीकृत पार्टी ने उग्र आदोलनों की शुरुआत की है ,इन आदोलनों के पश्चात तेजी से सरकारों का ध्यान बुन्देलखण्ड की बदहाली पर गया . वर्तमान समय में बुन्देलखण्ड में अनेक कार्यक्रम प्रात निर्माण की लड़ाई के लिए चलाये जा रहे है। रैलियों, आदोलनों के फलस्वरूप भी प्रात अब भी देश के नक्शे पर उभर नहीं पाया है। बुन्देलखण्ड में इतना राजस्व प्राप्त होता है जो एक प्रात के लिए जरूरी है। इसके बावजूद भी सरकारे इसे प्रात का नाम देने में सकुचा रही है। बुद्धिजीवी लोगों का मानना है कि सरकारों द्वारा बुन्देलखण्ड को प्रात नहीं बनाने के पीछे बड़े राजनैतिक दल ही है . सपा जैसे भी कई दल है जो अलग प्रात बनाने पर सीधे तौर पर न कर चुके है। उन्हे लग रहा है यदि बुन्देलखण्ड राज्य बन गया तो उनका बड़ा वोट बैंक खिसक जायेगा। बुद्धिजीवी मानते है कि भले ही बुन्देलखण्ड में अशिक्षितों की बड़ी तादाद हो लेकिन समय आने पर इस क्षेत्र के लोग ऐसे राजनैतिक दलों को सबक सिखा देंगे।आगामी लोकसभा चुनाव में यहाँ की जनता इनसे खुलकर बदला लेने के मूड में है

रविवार, 18 जनवरी 2009

एकीकृत पार्टी बनाएगी एक लाख नए सदस्य

बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य है कि लोक सभा चुनाव से पूर्व पूरे बुंदेलखंड मे सदस्य संख्या कम से कम एक लाख हो जाये। हालाँकि देखने मे यह अत्यंत कठिन काम प्रतीत होता है, परन्तु पार्टी संगठन के पदाधिकारी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन रात लगे हुए हैं। बांदा मे सुरेन्द्र तिवारी, झाँसी मे कुवर बहादुर आदिम, छतरपुर मे राजा प्रजापति, चित्रकूट मे लवलीन द्विवेदी ने इस अभियान की शुरुआत कर दी है। पार्टी के प्रांतीय महासचिव सुरेन्द्र तिवारी ने बताया कि हम गाँव गाँव मे चौपाल लगाकर लोगो को सदस्यता गृहण करवा रहे हैं। पार्टी की साधारण सदस्यता शुल्क पॉँच रुपया तथा सक्रिय सदस्यता शुल्क दस रुपया रखी गयी है।

गुरुवार, 15 जनवरी 2009

बुंदेलखण्ड राज्य के लिए गाँव गाँव में आयोजित होंगी संकल्प सभायें

बांदा। बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी पृथक बुन्देलखंड राज्य का मुद्दा लेकर चुनाव लड़ने की तयारी में जुट चुकी है। चुनाव से पूर्व बुंदेलखंड क्षेत्र के हर मतदाता तक पृथक प्रान्त के औचित्य को पहुचाने के लिए पार्टी ने विभिन्न कार्यक्रम आरम्भ किए हैं। ब्लाक (प्रखंड) स्तर पर टोलियाँ गठित की जा रही हैं जो सम्बंधित प्रखंड के अन्दर आने वाले सभी गावों में बारी-बारी से पहुंचकर वहां संकल्प सभाएं आयोजित करके लोगो को शपथ गृहण करवाई जायेगी तथा पृथक राज्य आन्दोलन में सर्वस्व समर्पण के संकल्प को दोहराया जाएगा। उक्त जानकारी पार्टी संयोजक संजय पाण्डेय ने यहाँ एक प्रेसवार्ता में दी। पाण्डेय ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि फरबरी में बांदा में "कारण बताओ रैली " का आयोजन किया जाएगा जिसमे बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों से आए हजारों आन्दोलनकारी केन्द्र और राज्य सरकारों को घेरते हुए सबाल पूछेंगे कि आख़िर बुन्देलखंड राज्य मसले पर सार्थक कार्यवाही क्यों नही? कारण पूछा जाएगा कि जब मायावती बुन्देलखंड राज्य की पक्षधर है तो वे केन्द्र को प्रस्ताव क्यों नही भेजती? कारण पूछा जाएगा कि जब मनमोहन सिंह समेत पूरी कांग्रेस और यूपीए सरकार बुंदेलखंड राज्य की वकालत करते हैं तो राज्य पुनर्गठन आयोग क्यों नही बनता? कारण पूछा जाएगा कि कांग्रेस और बसपा के सांसद संसद में इस मुद्दे को क्यों नही उठाते?कांग्रेस और बसपा के नेताओं से पूछा जाएगा कि वे बुंदेलखंड राज्य मामले पर फर्जी बयानबाजी कर पॉँच करोड़ बुन्देलखंडी लोगो का भावनात्मक शोषण करने से बाज क्यों नही आते? कारण पूछा जाएगा कि कांग्रेस और बसपा इस मुद्दे के पक्ष में है तो वे बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल क्यों नही करती?कुल मिलाकर बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी
फर्जी शिगूफे छोड़ने वालों को बेनकाब करेगी। बांदा के बाद झाँसी और खजुराहो में भी ऐसी रैलियां होगी.

बुधवार, 7 जनवरी 2009

बुन्देलखंड राज्य की मांग को चुनावी रूप देना होगा : संजय पाण्डेय

झांसी। बुन्देलखण्ड एकीकृत पार्टी ने पृथक राज्य निर्माण के मुद्दे पर राजनीति को गरमाने की तैयारी कर ली है। पार्टी बुन्देलखंड व दिल्ली की सीटों पर चुनाव लड़ेगी और जरूरत पड़ने पर राज्य निर्माण की वकालत करने वाले दूसरे दलों के प्रत्याशियों को समर्थन भी देगी।
पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने आज यहां एक होटल में पत्रकारों को राज्य निर्माण की लड़ाई पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य निर्माण की मांग एक राजनीतिक मांग है, इसीलिए राजनीतिक दबाव बनाए बगैर इसे पाना कठिन है। इसके लिए जरूरी है कि राज्य निर्माण समर्थक संसद में पहुंचें। इसके लिए मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की सभी सीटों व दिल्ली के बुन्देलखण्डी बहुल क्षेत्र दिल्ली बाहरी व कुछ अन्य सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता अपने दल के प्रत्याशी खड़े करने की रहेगी, लेकिन राज्य निर्माण के प्रबल समर्थक दूसरे दलों के प्रत्याशियों को भी समर्थन दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में छतरपुर जिले की महाराजपुर से पार्टी के समर्थित प्रत्याशी मानवेन्द्र सिंह की जीत से उनके कार्यकर्ताओं व समर्थकों में उत्साह है। अब वे लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए है।
पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुंवर बहादुर आदिम ने कहा कि कुछ लोग बुन्देलखण्ड का मुद्दा लेकर चुनाव जीतकर विधानसभा व लोकसभा में पहुंचे, लेकिन उन्होंने कभी इस मुद्दे को सदन में नहीं रखा। इसीलिए जरूरी है कि राज्य निर्माण के समर्थक विधायक व सांसद अपने दलों के चुनाव घोषणा पत्र में इसे शामिल कराएं। पत्रकार वार्ता में महासचिव शांति स्वरूप पस्तोर, महानगर अध्यक्ष नरेन्द्र कुशवाहा, अवधेश कुमारी पटेल, घनश्याम सिंह व अजय पाण्डेय उपस्थित रहे।

गुरुवार, 1 जनवरी 2009

विकसित प्रदेश बनेगा बुंदेलखंड : संजय पाण्डेय

झाँसी । बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि यदि भारत की संसद बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए गंभीरता से सोचती है और बुंदेलखंड राज्य का गठन होता है तो जो बुन्देलखंड आज गरीबी और बदहाली के मामले में देश में मशहूर है वही बुन्देलखंड देश के सबसे समृद्ध क्षेत्र के रूप में जाना जायेगा. क्योंकि बुन्देलखंड में संसाधनों की कमी नहीं बल्कि सुशासन और अच्छी नीतियों की कमी है या यूं कहें की दो विशालकाय राज्यों केबीच घिरे होने से ऐसी भौगोलिक संरचना बन जाती है कि दोनों में से कोई भी सरकार चाहकर भी विकास नहीं करवा पाती है .बुन्देलखंड क्षेत्र में बालू ,संगमरमर से लेकर सोना,यूरेनियम और हीरा तक के भण्डार हैं. मानव संसाधन तथा पशु संसाधन ,कृषि संसाधन तथा वन संसाधन यहाँ पर्याप्त है ,सात सात नदियाँ भी बुन्देलखंड क्षेत्र से होकर गुजरती हैं जरूरत है तो सिर्फ उचित जल संचय प्रणाली की और बहुद्देशीय नदी जल परियोजनाओ के गठन की जो कि अलग राज्य बनने पर ही संभव हैं.
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