बुधवार, 17 दिसंबर 2008
बुन्देलखण्ड में खनिज संसाधनों की कमी नही है : संजय पाण्डेय
नई दिल्ली। बुन्देलखंड को प्रथक राज्य बना दिया जाए तो यह अपने आप में समर्थ राज्य होगा इसे केंद्रीय सहायता की भी जरूरत नही पड़ेगी । बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि कुछ लोग बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण का विरोध सिर्फ़ इसलिए करते है कि बुन्देलखण्ड अभी संसाधनों के हिसाब से आत्म निर्भर नही है ,किंतु उनका सोचना एक दम ग़लत है । पाण्डेय ने कहा कि बुंदेलखण्ड में सम्पदा भरपूर है , इसलिए यदि इसे अलग राज्य बना दिया तो यह देश का सबसे विकसित प्रदेशों में से एक होगा ।संजय पाण्डेय के अनुसार :-बालू से लेकर हीरा और यूरेनियम तक के भण्डार है बुन्देलखण्ड में।लगभग ५००० वर्षों से पन्ना क्षेत्र हीरा उत्पादन के लिए विश्व-विख्यात है। अब यहां हिनौता, मझगवां तथा छतरपुर जनपद के अंगोर नामक स्थान में भी हीरा प्राप्त होने की संभावना है। उत्पादन क्षेत्र विस्तृत हुआ है। लगभग ४०००० कैरेट हीरा निकाला जा चुका है और १४००००० कैरेट के भण्डार शेष है। नई खदानों में से इतना ही प्राप्त होने की संभावना हैं। सन् १९६८ ई० में नेशनल मिनरल डेवलमेन्ट कॉर्पोरेशन पन्ना द्वारा यांत्रिक प्रक्रिया से ६२ मीटर गहरी खुदाइ की जा चुकी है। पन्ना में वार्षिक उत्पादन २६००० कैरेट हीरा है, जिससे करोडो रुपये की रॉयल्टी प्रान्तीय सरकार को प्राप्त होती है। बुंदेलखण्ड में वास्तु पत्थर के अक्षय भण्डार हैं। बालू का पत्थर आदि काल से अपने सुहावने रंगों, एक समान कणों नियमित संस्करण, सुगम सुकरणीयता तथा चिरस्थायित्व के लिए समूचे उत्तर भारत में वास्तु पत्थर के रुप में प्रसिद्ध है। यहाँ के ग्रेनाइट पत्थर की विदेशों में विशेष कर जर्मनी, जापान, इटली में इसकी बड़ी मांग है। कांच उद्योग में प्रयोग होने वाली बालू के निक्षेप इतने बड़े हैं कि सम्पूर्ण भारत की मांग ८० प्रतिशत यहीं से पूरी हो सकती है। अनेक स्थानों में सिलिका की मात्रा ९९.२ प्रतिशत है। प्यालियों के निर्माण में गोरा पत्थर कई स्थानों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। इसके ज्ञात निक्षेपों का आंकलन ४३ लाख टन किया गया है। अन्य भण्डारों का सर्वेक्षण शेष है।अभी हाल में बुन्देलखण्ड के बांदा जनपद और उनके समीपस्थ क्षेत्रों में एल्यूमीनियम अयस्क बॉक्साइट के बृहद भण्डार का पता चला है। यह निक्षेप प्रति वर्ष एक लाख टन एल्यूमीनियम उत्पादन की क्षमता वाले कारखाने को कम से कम ३५ वर्षों तक अयस्क प्रदान कर सकता है।बुंदेलखंड के छतरपुर जनपद में चूने के पत्थर प्रचुर भण्डार हैं, अन्य स्थानों में सर्वेक्षण शेष है। बांदा जनपद में झोंका भट्टी के उपयुक्त गालक श्रेणी के डोलोमाइट का आंकलित निकाय लगभग ६० करोड़ टन से अधिक है। मृतिका शिल्प की उपयुक्त सफेद चिकनी मिट्टी के बृहद भण्डार है। ज्ञातव्य निक्षेपों का आकलन ५ लाख टन से अधिक है। बांदा जनपद के लखनपुर खण्ड में यह २ लाख टन से अधिक है। बुन्देलखण्ड में पाए जाने वाले खनिजों में फोस्फोराइट, गैरिक जिप्सम, ग्लैकोनाइट, लौह अयस्क, अल्प मूल्य रत्न आदि हैं। संभावित खनिजों कीसूची में तांबा, सीसा, निकिल, टिन, टंगस्टन, चांदी, सोना आदि। इन्ही दिनों बुन्देलखण्ड में सोने के विशाल भण्डार की खबरें भी समाचार पत्रों में पढने को मिली ।बुन्देलखण्ड के एक बड़े भू-भाग चौरई में ग्रेनाइट चट्टानें पाई जाती हैं। यह चट्टानें अधिकतर रेडियोधर्मी यूरेनियत युक्त होती हैं तथा इसकी मात्रा ३० ग्राम प्रति टन तक हो सकती है। बुन्देलखण्ड में सीसा अयस्क, - गैलिना - टीकमगढ़ जिले में बन्धा बहादुरपुर तथा दतिया जनपद में पए जाते हैं। टीकमगढ़ जिले में ग्रेनाइट पॉलिकिंशग का कारखाना स्थापित किया जा सकता है। विदेशों में मिरर पॉलिश हेतु बहुत मांग है। दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर जिले में पायरोंफायलाइट, - पोतनी माटी - औद्योगिक दृष्टि से उपयोगी है। एस्वेस्टेस तथा निकिल की प्राप्ति सागर जनपद में है। लौह अयस्क टीकमगढ़, छतरपुर, सागर जिले में प्राप्त हैं। ताम्र अयस्क के भण्डार छतरपुर, बॉक्साइट के भण्डार पन्ना, सागर तथा मणि पत्थर दतिया में प्राप्त हैं।लौह अयस्क के भण्डार मानिकपुर - कर्बी-, बेरवार - बेरार - ललितपुर में अनुमानतः १० करोड़ टन खनिज के हैं। इसमें ३५ से ६७ प्रतिशत लौह प्राप्त हैं जो स्पंज आयरन हेतु उपयोगी है। सोनरई - ललितपुर - में ४०० मीटर से १००० मी। लम्बे तथा १ से ३ मीटर मोटे ताम्र अयस्क भण्डार हैं, जिनमें ०.५ प्रतिशत तांबा है। शीशे के बालू, बरगढ़ - कर्वी - में अनुमानतः ५ करोड़ टन है जो विभिन्न स्तरीय है। नरैनी - बांदा में स्वर्ण की प्राप्ति २ ग्राम प्रति टन है। बॉक्साइट भण्डार बांदा में ८३ टन अनुमानित है।कहने का तात्पर्य है कि बुंदेलखंड आर्थिक संसाधनों के लिहाज से किसी भी भारतीय प्रदेश से पीछे नही है। इसलिए बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी का तर्क है कि बुन्देलखण्ड को अलग राज्य बनाने की स्थिति में यहाँ संसाधनों की कमी नही होने पायेगी।
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