चिट्ठाजगत

मंगलवार, 30 दिसंबर 2008

बड़े राज्यों को पुनर्गठित करके छोटे राज्यों का गठन बहुत जरूरी :संजय पाण्डेय

नई दिल्ली।जनसंख्या एवं क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के प्रदेशों के आकारों में बड़ी विषमता है। एक तरफ़ बीस करोड़ से भी अधिक आबादी वाले उत्तर प्रदेश जैसे भारी भरकम राज्य तो वहीं सिक्किम जैसे छोटे प्रदेश जिसकी जनसंख्या मात्र छः लाख है। इसी तरह एक ओर राजस्थान जैसा लंबा चौडा राज्य जिसका क्षेत्रफल साढे तीन लाख वर्ग किमी है वहीं लक्षद्वीप मात्र 32 वर्ग किमी ही है । किंतु तथ्य बताते है कि छोटे प्रदेशों में विकास की दर कई गुना अधिक है।उदाहरण के लिए बिहार की प्रति व्यक्ति आय आज मात्र 3835 रु है जबकि हिमाचल जैसे छोटे राज्य में यही 18750 रु है । छोटी इकाइयों में कार्य क्षमता अधिक होती है । सिर्फ आर्थिक मामले में ही नहीं बल्कि शिक्षा,स्वास्थ्य जैसे विभिन्न मामलो में भी छोटे प्रदेश आगे हैं। जैसे कि शिक्षा के क्षेत्र में यूपी का देश में 31 वां स्थान है (साक्षरता दर -57%) जबकि इसी से अलग होकर नवगठित हुआ उत्तराँचल प्रान्त शिक्षा के हिसाब से भारत में 14 वां स्थान रखता है (साक्षरता दर -72 %)।बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार यदि भारत को वर्ष 2020 तक विकसित देश बनाना है तो भारत के राज्यों का एक बार पुनर्गठन जरूरी है । पाण्डेय ने कहा कि जब तक भारत में बुन्देलखंड और विदर्भ जैसे अति पिछडे क्षेत्र बदहाल हैं (जहाँ विकास तो दूर लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं) तब तक विकसित भारत की परिकल्पना भी बेमानी होगी। क्योंकि जिस तरह शरीर को तभी स्वस्थ कहा जा सकता है जब शरीर के सभी अंग स्वस्थ हों , ठीक उसी तरह भारत को तभी विकसित कहा जायेगा जब इसकी सीमा के भीतर आने वाले सभी भाग समृद्ध होंगे । संजय पाण्डेय के अनुसार बुन्देलखंड जैसे पिछडे क्षेत्रों को नया राज्य बनाकर विकास के नए आयाम स्थापित किये जा सकते हैं. दरअसल अलग राज्य बनने पर केन्द्रित विकास के चलते द्रुत गति से समृद्धि लाई जा सकती है । अपार संसाधनों से भरपूर बुन्देलखंड क्षेत्र में अगर कमी है तो सुशासन की, जो कि अलग प्रान्त बनने कि स्थिति में ही संभव है । उन्होंने कहा कि राज्य बनने से पहले लोग हरियाणा को घास फूस का क्षेत्र कहा करते थे, किन्तु अलग राज्य बनने के बाद आज हरियाणा का विकास समूचे देश के सामने है । आज हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय 16200 रु है। पाण्डेय ने कहा कि भारत के बड़े राज्यों को पुनर्गठित करके छोटे राज्यों का गठन बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका पचास छोटे राज्यों का संघ है इसलिए उसकी सम्पन्नता आज जगजाहिर है। हमारे देश में कुछ लोग छोटे राज्यों का विरोध इसलिए करते हैं क्योंकि उनका मानना होता है कि इससे देश टुकडों में बटता है,किन्तु उनकी यह धारणा विल्कुल गलत है । आज़ादी के समय भारत में 14 प्रदेश थे आज 35 हैं तो क्या इतने सारे नए प्रदेशों के बनने से देश खंडित हुआ?नहीं । तब भी भारत अखंड था ,आज भी अखंड है और कुछ नए राज्य बने तो भी भारत अखंड ही रहेगा।

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2008

हमारे देश में चार करोड़ बुन्देली भाषी लोग,फ़िर भी बुन्देली भाषा अनुसूची -8 में नही

भारतीय संविधान में मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाओँ को अनुसूची क्रमांक आठ में रखा गया है और इन भाषाओँ के संवर्धन के लिए अलग से राजभाषा आयोग की व्यवस्था भी संविधान में है ।संविधान की आठवी अनुसूची में कई भाषाएँ तो ऐसी हैं जिनके प्रयोगकर्ता एक करोड़ से कम है (असमिया -89 लाख, मैथिली-61 लाख, संथाली-37 लाख, कश्मीरी - 24 लाख , कोंकणी-15 लाख, नेपाली-13 लाख़, डोगरी-13 लाख़, सिंधी-12 लाख ) किंतु हमारे देश में चार करोड़ बुन्देली भाषी लोग हैं फ़िर भी बुन्देली भाषा को मान्यता प्रदान करते हुए इसे अनुसूची -8 में शामिल नही किया गया ।
बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार बुन्देली भाषा को राजकीय संरक्षण न मिलने से बुन्देली साहित्य और साहित्यकारों की दुर्दशा हो रही है किन्तु बुन्देलखंड क्षेत्र के सांसद इस विषय को संसद में उठाने की जरूरत ही नहीं समझते हैं । इसलिए बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी ने अपने एजेंडे में पृथक बुन्देलखंड राज्य निर्माण के साथ साथ बुन्देली भाषा को सम्मान दिलाते हुए इसे संविधान की आठवी अनुसूची में शामिल करवाना अपने उद्देश्यों की उच्च वरीयता में रखा है ।

झाँसी-खजुराहो लिंक ट्रेन शुरू

बुन्देलखंड क्षेत्र के लोगो को आखिर एक नई रेल गाड़ी मिल ही गयी । चिर प्रतीक्षित महोबा-खजुराहो रेल लाइन का लालू प्रसाद यादव द्वारा आज उदघाटन के साथ ही झाँसी-खजुराहो लिंक ट्रेन को भी हरी झंडी मिल गयी. । यह ट्रेन झाँसी और खजुराहो के बीच चलेगी। इन दोनों स्टेशनों के मध्य २०० किमी का पूरा का पूरा क्षेत्र बुंदेलखंड क्षेत्र में ही आता है,इसलिए इस ट्रेन को बुन्देलखंड की लोकल ट्रेन कहा जा सकता है ।इस ट्रेन की शुरुआत होने से लोगो में खासा हर्ष है। बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार यह ट्रेन दो भागो में बटे बुन्देलखंड को एकीकृत करने में मददगार साबित होगी और साथ ही खजुराहो में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा ।

गुरुवार, 25 दिसंबर 2008

उगाही प्रथा बंद करे बसपा : संजय पाण्डेय

नई दिल्ली. बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी ने औरय्या के इंजिनियर मनोज गुप्ता हत्याकांड की कड़े शब्दों में निंदा की है । पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने जारी बयान में कहा है कि इस घटना से बसपा सरकार की लूट प्रथा का खुलासा हो गया। कहा कि बसपा जैसी पार्टियाँ देश की स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रणाली के भविष्य के लिए खतरा हैं। क्योंकि बहुजन समाज पार्टी आज लिमिटेड कम्पनी बनकर रह गयी ,है जहाँ एक मात्र लक्ष्य है, येनकेन प्रकारेण धन इकठ्ठा करना। श्री पाण्डेय ने कहा कि ऐसी पार्टियों को जनता वहिष्कृत करे ताकि आने वाली सरकारें धन उगाही के कदम उठाने से पहले कई बार सोचें।

रविवार, 21 दिसंबर 2008

बुंदेलखंड के जन प्रतिनिधि एक जुटता दिखाएँ : संजय पाण्डेय

छतरपुर(म.प्र.). बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने सघन जनसंपर्क के दौरान छतरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जब तक बुंदेलखंड क्षेत्र के सांसद और विधायक पृथक बुंदेलखण्ड राज्य की बात सदनों में नहीं उठाएंगे तब तक यह मांग हवा हवाई ही बनी रहेगी.उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य का हवाला देते हुए कहा कि वहां के जन प्रतिनिधियों की एकजुटता से ही वह अलग राज्य बना था, ठीक उसी तरह बुन्देलखंड के जन प्रतिनिधियों को भी अपनी पार्टी प्रोटोकाल से हटकर बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण के मुद्दे पर एकजुटता दिखानी चाहिए. पाण्डेय ने कहा कि बुंदेलखंड राज्य बनाये जाने कि मांग बहुत पुरानी है , किन्तु यह मांग अब तक इसलिए क्रियान्वित नहीं हो सकी क्योंकि यहाँ के सांसदों और विधायकों ने इस मांग को कभी संसद और विधान सभा में नहीं मजबूती से उठाया,पर यदि इस मांग को संवैधानिक शक्ति प्रदान करना है तो बुंदेलखंड के जन प्रतिनिधियों को एक मत होकर इस आवाज को उठाना होगा.

बुंदेलखण्ड : खाली होते गाँव के गाँव

महोबा. पिछले पॉँच वर्षों से भीषण सूखे की चपेट में रहे बुन्देलखंड क्षेत्र में इस बार औसत वर्षा होने से सूखा से तो निजात मिली किन्तु लोगो का आर्थिक संकट अभी तक दूर नहीं हो सका . पिछले वर्षों के अकाल ने बुंदेलखंड क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था,लोग दाने-दाने को मोहताज़ हो गए थे ,लोग और उनके मवेशी बूँद -बूँद पानी के लिए तरसने को मजबूर थे ,खेतों में एक-एक मीटर गहरीं दरारें पद गयीं थीं .किन्तु इस वर्ष अच्छी बारिश हो जाने से बुन्देलखण्ड के लोगो को मनो जान ही मिल गयी थी.परन्तु खरीफ की फसल अति वर्षा की भेंट चढ़ गयी और रबी की फसल के लिए खाद-बीज के लिए पैसे न होने केचलते लोग मन मसोस कर रह गए. इतना ही नहीं पानी बरस जाने से बाद से वे सारी सरकारी सहायतायें भी बंद कर दीं गयीं थीं जो सूखे दौरान क्षेत्र के लोगो को मिल रहीं थीं.
कुछ लोगो ने पुनः क़र्ज़ काढ कर खाद, बीज का जुगाड़ तो कर लिया और बुबाई भी कर दी,किन्तु फसल आने में तो अभी तीन महीने शेष हैं,पेट की भी चिंता है, साहूकारों का क़र्ज़ भी उतारना है इसलिए लोग मजबूर होकर मजदूरी की खातिर महानगरों के लिए पलायन कर रहे हैं. रोज़ हजारों युवक दिल्ली मुम्बई के लिए प्रस्थान कर रहे हैं,फलस्वरूप यहाँ के गावों में बुजुर्ग और महिलाएं ही शेष रह गए है, गाँव के गाँव खाली हो गये हैं.बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटने में अभी वक्त लगेगा ,इसलिए यहाँ के लोगों को जो सरकारी सहायताये सूखे के दौरान दी जाती थीं वे अभी बंद नहीं की जानी चाहिए, इतना ही नहीं बल्कि खाद,बीज,सिंचाई,लगान आदि में भी राहत की पेशकश सरकारों की तरफ से की जानी चाहिए.

बुंदेलखण्ड के सांसद-विधायक एक स्वर में मांग रखें : संजय पाण्डेय

छतरपुर(म.प्र.). बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने सघन जनसंपर्क के दौरान छतरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जब तक बुंदेलखंड क्षेत्र के सांसद और विधायक पृथक बुंदेलखंड राज्य की बात सदनों में नहीं उठाएंगे तब तक यह मांग हवा हवाई ही बनी रहेगी.उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य का हवाला देते हुए कहा कि वहां के जन प्रतिनिधियों की एकजुटता से ही वह अलग राज्य बना था, ठीक उसी तरह बुंदेलखंड के जन प्रतिनिधियों को भी अपनी पार्टी प्रोटोकाल से हटकर बुंदेलखंड राज्य निर्माण के मुद्दे पर एकजुटता दिखानी चाहिए. पाण्डेय ने कहा कि बुंदेलखण्ड राज्य बनाये जाने कि मांग बहुत पुरानी है , किन्तु यह मांग अब तक इसलिए क्रियान्वित नहीं हो सकी क्योंकि यहाँ के सांसदों और विधायकों ने इस मांग को कभी संसद और विधान सभा में नहीं मजबूती से उठाया,पर यदि इस मांग को संवैधानिक शक्ति प्रदान करना है तो बुंदेलखंड के जन प्रतिनिधियों को एक मत होकर इस आवाज को उठाना होगा.

बुंदेलखण्ड : पलायन से वीरान हुए गाँव

महोबा। पिछले पॉँच वर्षों से भीषण सूखे की चपेट में रहे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में इस बार औसत वर्षा होने से सूखा से तो निजात मिली किन्तु लोगो का आर्थिक संकट अभी तक दूर नहीं हो सका . पिछले वर्षों के अकाल ने बुंदेलखण्ड क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था,लोग दाने-दाने को मोहताज़ हो गए थे ,लोग और उनके मवेशी बूँद -बूँद पानी के लिए तरसने को मजबूर थे ,खेतों में एक-एक मीटर गहरीं दरारें पद गयीं थीं .किन्तु इस वर्ष अच्छी बारिश हो जाने से बुन्देलखंड के लोगो को मनो जान ही मिल गयी थी.परन्तु खरीफ की फसल अति वर्षा की भेंट चढ़ गयी और रबी की फसल के लिए खाद-बीज के लिए पैसे न होने केचलते लोग मन मसोस कर रह गए. इतना ही नहीं पानी बरस जाने से बाद से वे सारी सरकारी सहायतायें भी बंद कर दीं गयीं थीं जो सूखे दौरान क्षेत्र के लोगो को मिल रहीं थीं.
कुछ लोगो ने पुनः क़र्ज़ काढ कर खाद, बीज का जुगाड़ तो कर लिया और बुबाई भी कर दी,किन्तु फसल आने में तो अभी तीन महीने शेष हैं,पेट की भी चिंता है, साहूकारों का क़र्ज़ भी उतारना है इसलिए लोग मजबूर होकर मजदूरी की खातिर महानगरों के लिए पलायन कर रहे हैं. रोज़ हजारों युवक दिल्ली मुम्बई के लिए प्रस्थान कर रहे हैं,फलस्वरूप यहाँ के गावों में बुजुर्ग और महिलाएं ही शेष रह गए है, गाँव के गाँव खाली हो गये हैं.बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटने में अभी वक्त लगेगा ,इसलिए यहाँ के लोगों को जो सरकारी सहायताये सूखे के दौरान दी जाती थीं वे अभी बंद नहीं की जानी चाहिए, इतना ही नहीं बल्कि खाद,बीज,सिंचाई,लगान आदि में भी राहत की पेशकश सरकारों की तरफ से की जानी चाहिए.

बुंदेलखण्ड : पलायन से वीरान हुए गाँव

महोबा। पिछले पॉँच वर्षों से भीषण सूखे की चपेट में रहे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में इस बार औसत वर्षा होने से सूखा से तो निजात मिली किन्तु लोगो का आर्थिक संकट अभी तक दूर नहीं हो सका . पिछले वर्षों के अकाल ने बुंदेलखण्ड क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था,लोग दाने-दाने को मोहताज़ हो गए थे ,लोग और उनके मवेशी बूँद -बूँद पानी के लिए तरसने को मजबूर थे ,खेतों में एक-एक मीटर गहरीं दरारें पद गयीं थीं .किन्तु इस वर्ष अच्छी बारिश हो जाने से बुन्देलखंड के लोगो को मनो जान ही मिल गयी थी.परन्तु खरीफ की फसल अति वर्षा की भेंट चढ़ गयी और रबी की फसल के लिए खाद-बीज के लिए पैसे न होने केचलते लोग मन मसोस कर रह गए. इतना ही नहीं पानी बरस जाने से बाद से वे सारी सरकारी सहायतायें भी बंद कर दीं गयीं थीं जो सूखे दौरान क्षेत्र के लोगो को मिल रहीं थीं.
कुछ लोगो ने पुनः क़र्ज़ काढ कर खाद, बीज का जुगाड़ तो कर लिया और बुबाई भी कर दी,किन्तु फसल आने में तो अभी तीन महीने शेष हैं,पेट की भी चिंता है, साहूकारों का क़र्ज़ भी उतारना है इसलिए लोग मजबूर होकर मजदूरी की खातिर महानगरों के लिए पलायन कर रहे हैं. रोज़ हजारों युवक दिल्ली मुम्बई के लिए प्रस्थान कर रहे हैं,फलस्वरूप यहाँ के गावों में बुजुर्ग और महिलाएं ही शेष रह गए है, गाँव के गाँव खाली हो गये हैं.बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटने में अभी वक्त लगेगा ,इसलिए यहाँ के लोगों को जो सरकारी सहायताये सूखे के दौरान दी जाती थीं वे अभी बंद नहीं की जानी चाहिए, इतना ही नहीं बल्कि खाद,बीज,सिंचाई,लगान आदि में भी राहत की पेशकश सरकारों की तरफ से की जानी चाहिए.

बुधवार, 17 दिसंबर 2008

बुन्देलखण्ड में खनिज संसाधनों की कमी नही है : संजय पाण्डेय

नई दिल्ली। बुन्देलखंड को प्रथक राज्य बना दिया जाए तो यह अपने आप में समर्थ राज्य होगा इसे केंद्रीय सहायता की भी जरूरत नही पड़ेगी । बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि कुछ लोग बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण का विरोध सिर्फ़ इसलिए करते है कि बुन्देलखण्ड अभी संसाधनों के हिसाब से आत्म निर्भर नही है ,किंतु उनका सोचना एक दम ग़लत है । पाण्डेय ने कहा कि बुंदेलखण्ड में सम्पदा भरपूर है , इसलिए यदि इसे अलग राज्य बना दिया तो यह देश का सबसे विकसित प्रदेशों में से एक होगा ।संजय पाण्डेय के अनुसार :-बालू से लेकर हीरा और यूरेनियम तक के भण्डार है बुन्देलखण्ड में।लगभग ५००० वर्षों से पन्ना क्षेत्र हीरा उत्पादन के लिए विश्व-विख्यात है। अब यहां हिनौता, मझगवां तथा छतरपुर जनपद के अंगोर नामक स्थान में भी हीरा प्राप्त होने की संभावना है। उत्पादन क्षेत्र विस्तृत हुआ है। लगभग ४०००० कैरेट हीरा निकाला जा चुका है और १४००००० कैरेट के भण्डार शेष है। नई खदानों में से इतना ही प्राप्त होने की संभावना हैं। सन् १९६८ ई० में नेशनल मिनरल डेवलमेन्ट कॉर्पोरेशन पन्ना द्वारा यांत्रिक प्रक्रिया से ६२ मीटर गहरी खुदाइ की जा चुकी है। पन्ना में वार्षिक उत्पादन २६००० कैरेट हीरा है, जिससे करोडो रुपये की रॉयल्टी प्रान्तीय सरकार को प्राप्त होती है। बुंदेलखण्ड में वास्तु पत्थर के अक्षय भण्डार हैं। बालू का पत्थर आदि काल से अपने सुहावने रंगों, एक समान कणों नियमित संस्करण, सुगम सुकरणीयता तथा चिरस्थायित्व के लिए समूचे उत्तर भारत में वास्तु पत्थर के रुप में प्रसिद्ध है। यहाँ के ग्रेनाइट पत्थर की विदेशों में विशेष कर जर्मनी, जापान, इटली में इसकी बड़ी मांग है। कांच उद्योग में प्रयोग होने वाली बालू के निक्षेप इतने बड़े हैं कि सम्पूर्ण भारत की मांग ८० प्रतिशत यहीं से पूरी हो सकती है। अनेक स्थानों में सिलिका की मात्रा ९९.२ प्रतिशत है। प्यालियों के निर्माण में गोरा पत्थर कई स्थानों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। इसके ज्ञात निक्षेपों का आंकलन ४३ लाख टन किया गया है। अन्य भण्डारों का सर्वेक्षण शेष है।अभी हाल में बुन्देलखण्ड के बांदा जनपद और उनके समीपस्थ क्षेत्रों में एल्यूमीनियम अयस्क बॉक्साइट के बृहद भण्डार का पता चला है। यह निक्षेप प्रति वर्ष एक लाख टन एल्यूमीनियम उत्पादन की क्षमता वाले कारखाने को कम से कम ३५ वर्षों तक अयस्क प्रदान कर सकता है।बुंदेलखंड के छतरपुर जनपद में चूने के पत्थर प्रचुर भण्डार हैं, अन्य स्थानों में सर्वेक्षण शेष है। बांदा जनपद में झोंका भट्टी के उपयुक्त गालक श्रेणी के डोलोमाइट का आंकलित निकाय लगभग ६० करोड़ टन से अधिक है। मृतिका शिल्प की उपयुक्त सफेद चिकनी मिट्टी के बृहद भण्डार है। ज्ञातव्य निक्षेपों का आकलन ५ लाख टन से अधिक है। बांदा जनपद के लखनपुर खण्ड में यह २ लाख टन से अधिक है। बुन्देलखण्ड में पाए जाने वाले खनिजों में फोस्फोराइट, गैरिक जिप्सम, ग्लैकोनाइट, लौह अयस्क, अल्प मूल्य रत्न आदि हैं। संभावित खनिजों कीसूची में तांबा, सीसा, निकिल, टिन, टंगस्टन, चांदी, सोना आदि। इन्ही दिनों बुन्देलखण्ड में सोने के विशाल भण्डार की खबरें भी समाचार पत्रों में पढने को मिली ।बुन्देलखण्ड के एक बड़े भू-भाग चौरई में ग्रेनाइट चट्टानें पाई जाती हैं। यह चट्टानें अधिकतर रेडियोधर्मी यूरेनियत युक्त होती हैं तथा इसकी मात्रा ३० ग्राम प्रति टन तक हो सकती है। बुन्देलखण्ड में सीसा अयस्क, - गैलिना - टीकमगढ़ जिले में बन्धा बहादुरपुर तथा दतिया जनपद में पए जाते हैं। टीकमगढ़ जिले में ग्रेनाइट पॉलिकिंशग का कारखाना स्थापित किया जा सकता है। विदेशों में मिरर पॉलिश हेतु बहुत मांग है। दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर जिले में पायरोंफायलाइट, - पोतनी माटी - औद्योगिक दृष्टि से उपयोगी है। एस्वेस्टेस तथा निकिल की प्राप्ति सागर जनपद में है। लौह अयस्क टीकमगढ़, छतरपुर, सागर जिले में प्राप्त हैं। ताम्र अयस्क के भण्डार छतरपुर, बॉक्साइट के भण्डार पन्ना, सागर तथा मणि पत्थर दतिया में प्राप्त हैं।लौह अयस्क के भण्डार मानिकपुर - कर्बी-, बेरवार - बेरार - ललितपुर में अनुमानतः १० करोड़ टन खनिज के हैं। इसमें ३५ से ६७ प्रतिशत लौह प्राप्त हैं जो स्पंज आयरन हेतु उपयोगी है। सोनरई - ललितपुर - में ४०० मीटर से १००० मी। लम्बे तथा १ से ३ मीटर मोटे ताम्र अयस्क भण्डार हैं, जिनमें ०.५ प्रतिशत तांबा है। शीशे के बालू, बरगढ़ - कर्वी - में अनुमानतः ५ करोड़ टन है जो विभिन्न स्तरीय है। नरैनी - बांदा में स्वर्ण की प्राप्ति २ ग्राम प्रति टन है। बॉक्साइट भण्डार बांदा में ८३ टन अनुमानित है।कहने का तात्पर्य है कि बुंदेलखंड आर्थिक संसाधनों के लिहाज से किसी भी भारतीय प्रदेश से पीछे नही है। इसलिए बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी का तर्क है कि बुन्देलखण्ड को अलग राज्य बनाने की स्थिति में यहाँ संसाधनों की कमी नही होने पायेगी।

बुन्देलखण्ड के लोगों का अब और अधिक शोषण बर्दाश्त नही :संजय पाण्डेय

नई दिल्ली। बुंदेलखण्ड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक श्री संजय पाण्डेय ने कहा कि आज़ादी के साठ वर्ष हो चुके हैं फ़िर भी बुन्देलखंड क्षेत्र विकास की दृष्टि से वही का वही है । पाण्डेय ने कहा कि इन साठ वर्षों में जितना शोषण बुंदेलखंड के लोगों का हुआ शायद देश में और कही नही हुआ।आज़ादी के पूर्व इस क्षेत्र को सामंतवादी राजाओं ने शोषित रखा ,किंतु दुःख की बात तो यह है कि स्वतंत्रता के बाद भी इस क्षेत्र को शोषण से मुक्ति नही मिली ।
केन्द्र और राज्य सरकारों को अरबों रुपये का राजस्व खनिज संसाधनों के रूप में इस क्षेत्र से मिलता है , बदले में इस क्षेत्र के लोगों को मिलती है बदहाली। क्या यह राजनीतिक शोषण नही है? लगभग शून्य औद्योगीकरण वाले इस भाग में रोजगार के साधनों का पूर्णतया अभाव है । यदि यहाँ का निवासी खेती भी करना चाहे तो यहाँ की सिचाई प्रणाली अंग्रेजों के ज़माने की है । या तो पानी के अभाव में भूमि परती पड़ी रहती है या फ़िर खेतों में सूखे से पड़ी दरारें भगवान भरोसे बारिश का इंतजार करती रहती हैं। केन्द्र सरकार से तो कभी कोई खास सहायता मिलती नही है ,राज्य सरकारें भी इसलिए इसके साथ सौतेलापन दिखाती हैं क्यों कि आधा बुंदेलखण्ड उत्तर प्रदेश में आता है और आधा मध्य प्रदेश में । इसलिए दो राज्यों के बीच फंसे इस भाग को बदले में उपेक्षा ही हाथ लगती है ।
आज बुन्देलखंड के नौजवानों की बात तो दूर यहाँ के बूढे और बच्चे भी दिल्ली,बम्बई और सूरत के लिए पलायन कर रहे हैं। वे अपने घरों को छोड़कर महानगरों के लिए पलायन जिंदा रहने के लिए कर रहे हैं न कि ऐशो आराम के लिए । दिल्ली में बुन्देलखंडी लोगों की छवि एक तसला ढोने वाले श्रमिक से ज्यादा नही रही ।पिछले वर्षों में भुखमरी और तंगहाली से जूझ रहे न जाने कितने किसानो ने आत्म हत्या की , किंतु सरकारों ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी नही ली । आज बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी का गठन बुन्देलखंड के लोगों को अपने हक़ के लिए संघर्ष करने के लिए एक राजनीतिक मंच मुहैया करवाने की दृष्टि से किया गया है । पार्टी बुन्देलखंड के लोगों को शोषण के विरुद्ध खड़े होने के लिए जागरुक कर रही है । पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय का कहना है कि या तो इस क्षेत्र को इतना विकसित कर दिया जाए कि यह भी देश के अन्य हिस्सों की तरह सम्रद्ध हो जाए या फ़िर इसे अलग राज्य बना दिया जाए ताकि शासन और प्रशासन की उपेक्षा से मुक्त होकर विकास की दृष्टि से आत्मनिर्भर हो सके । उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड के लोगों का शोषण अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा
चिट्ठाजगत रफ़्तार Hindi Blogs. Com - हिन्दी चिट्ठों की जीवनधारा Ab Rocket
Ab Rocket