चिट्ठाजगत

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

लाचार किसानों का मखौल उड़ाया गया है आमिर की पीपली लाइव में : संजय पाण्डेय


नई दिल्ली। बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि आमिर खान प्रोडक्शन लिमिटेड की फिल्म "पीपली लाइव" में कर्ज से डूबे तंगहाल और असहाय किसान परिवार का जो चित्रण किया है उसका प्रस्तुतीकरण बड़ा ही गलत है। महज दो घंटे के मनोरंजन की कीमत के रूप में हमारे अन्नदाता किसानों का उपहास करती और उनका मखौल उड़ाती यह फिल्म भले ही दाम और नाम कमा ले किन्तु ऐसी फिल्मो का बहिष्कार होना चाहिए नहीं तो समाज के अन्य दबे कुचले वर्गों की अस्मिता को मनोरंजन की सामग्री बनाते हुए भविष्य में ऐसी और भी फिल्मे बनेंगी ।
नत्था नामक बुन्देलखंडी किसान को धन के लोभ में आकर आत्महत्या करने की लालसा वाला दिखाकर फिल्मकार ने सिद्ध करना चाहा है कि बुंदेलखंड में पिछले वर्षों में किसानों द्वारा जो आत्महत्याएं हुईं वे मुआवजे के लिए हुईं । फिल्म निर्माता की इस सोच ने बुंदेलखंड तथा विदर्भ के उन गरीब परिवारों की आत्मा को झकझोर दिया है जिनके परिवारीजन सूखा और भुखमरी से हारकर मौत को गले लगा बैठे थे । संजय पाण्डेय ने कहा कि आमिर का यह तर्क कि उन्होंने इस फिल्म के माध्यम से मीडिया और राजनेताओं की खिचाई की है तो वे आमिर खान से पूछना चाहेंगे कि उन्होंने अपने इस प्रयोजन को पूरा करने के लिए एक लाचार किसान की इज्जत पर कीचड़ क्यों उछाला ? मीडिया और राजनेताओं को बेनकाब करने के लिए कोई और विषय भी तो लिया जा सकता था !!
ऑस्कर पाने की कामना पाल बैठे आमिर खान ने भूलवश या जानबूझ कर एक किसान के अहम् का जो मजाक उड़ाया है वह अक्षम्य है। उनकी इस फिल्म "पीपली लाइव" में यह सिद्ध करने की धूर्तता पूर्ण कोशिश की गयी है कि बुंदेलखंड के किसानों ने या तो पैसे के लिए आत्महत्या की है या फिर स्थानीय नेताओं के दबाव में आकर । किन्तु वास्तविकता यह नहीं है। सच्चाई यह है कि इन किसानों ने सरकारी नीतियों के साथ साथ प्रकृति से बुरी तरह हताश होकर आत्मघाती कदम उठाये ।
फिल्म में एक जगह मुख्यमंत्री द्वारा यह घोषणा करवाना कि "आत्महत्या के इच्छुक किसानों को एक एक लाख रुपये दिए जायेंगे", इससे समाज में आत्मघाती प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलेगा।
फिल्म का नायक नत्था जब आत्महत्या की घोषणा करता है तो उसका बेटा कहता है कि पापा जल्दी मरो क्योंकि मुवावजे के पैसे से मुझे ठेकेदार या थानेदार बनना है , यह दिखाकर फ़िल्मकार ने बुन्देली संस्कारों पर तोड़ मरोड़ कर प्रहार किया है कि यहाँ पर बेटों के लिए बाप के मरने का दुःख मुवावजा मिलने की ख़ुशी के सामने फीका है। इतना है नहीं जब झूठी हवा उडती है कि नत्था मर गया है तो उसकी बीबी , माँ और भाई एक भी आंसू बहाने की बजाये पैसे मिलने के सपने देखने लगते हैं। बल्कि नत्था की बीबी पोस्टमोर्टेम के दिन ही अपने जेठ बुधिया से पूछती है , "काये भओ कछू जुगाड़ " यानि कुछ पैसा वैसा मिला क्या ? यानि कुल मिलाकर यह फिल्म "पीपली लाइव" हमारे किसानों के सम्मान की विरोधी तो है ही साथ ही भारतीय मूल्यों के विपरीत है। जय जवान, जय किसान वाले देश में इस फिल्म के बाद निश्चित रूप से किसान की छवि पर आंच आएगी । इसके लिए आमिर खान के साथ साथ हमारा सेंसर बोर्ड भी दोषी है। संजय पाण्डेय ने अपील की कि किसानों के सम्मान की कीमत पर हमें अपना मनोरंजन नहीं करना चाहिए अर्थात हमें ऐसी फिल्मों का वहिष्कार करना चाहिए।

विदर्भ नहीं , बुंदेलखंड के किसानों पर बनी है आमिर की "पीपली लाइव"


नई दिल्ली । आमिर खान की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म "पीपली लाइव" विदर्भ नहीं बल्कि बुन्देलखंड के किसानो को लेकर बनी है। बुंदेलखंड के रायसेन जिले के बडवाई गाँव में फिल्माई गई इस फिल्म में बुन्देली संस्कृति तथा रहन सहन के साथ साथ पूरी तरह बुन्देली बोली ही प्रयुक्त की गयी है । उदाहारण के लिए नत्था की पत्नी धनिया अपने जेठ बुधिया से पूछती है " काये कछू भओ का आज ?" तो उत्तर में बुधिया कहता है कि " पईसा तौ मिले नैयाँ " । कहने का तात्पर्य पात्रों के बीच बातचीत में ठेठ बुन्देली ही प्रयुक्त की गयी है। इतना ही नहीं बुंदेलखंड को लेकर केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच जो वाकयुद्ध पिछले कुछ वर्षों से चल रहा है उसको भी इस फिल्म में भी पूरी तरह समाहित किया गया है । "महगाई मारें जात है " नामक चर्चित गाना बुन्देली साज-बाज के साथ गाया गया एक बुन्देली लोक गीत है । उल्लेखनीय है कि पिछले पॉँच वर्षों के दौरान बुन्देलखण्ड में लाखों किसान सूखे से प्रभावित हुए थे। इसके चलते यहाँ से भारी पलायन तथा भुखमरी के साथ साथ किसानों द्वारा आत्म हत्याओं की ख़बरें देश दुनिया तक पहुंची थी । इसी विषय को लेकर आमिर खान ने "पीपली लाइव" फिल्म बना डाली। किन्तु फिल्म में बुन्देलखंड के किसानों के हालातों का प्रस्तुतीकरण निंदनीय है।

मंगलवार, 24 नवंबर 2009

प्रान्त निर्माण हेतु बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी ने की सम्पूर्ण क्रांति की शुरुआत


बुदेलखंड एकीकृत पार्टी ने महारानी लक्ष्मी बाई की जयंती से बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए सम्पूर्ण क्रांति की शुरुआत की है। पार्टी का मानना है कि बुंदेलखंड राज्य तभी बनेगा जब बुंदेलखंड की जनता इसके लिए सम्पूर्ण क्रांति अख्तियार कर ले । महारानी लक्ष्मी बाई की जयंती पर झाँसी में पार्टी कार्यकर्ताओं को संकल्प दिलाते हुए पार्टी संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि जिस दिन बुंदेलखंड क्षेत्र के हर घर से एक एक आदमी प्रान्त निर्माण कि लडाई से जुड़ कर सड़क पर आ जायेगा उसी दिन प्रान्त का निर्माण हो जायेगा। पार्टी ने महारानी के जन्म दिवस को सम्पूर्ण क्रांति दिवस के रूप में मनाया। पार्टी जनों ने राज्य निर्माण की मांग में ओरछा के निकट बांदा- झाँसी यात्री ट्रेन को आधे घंटे तक रोक कर उग्र क्रांति की सांकेतिक शुरुआत की। संयोजक संजय पाण्डेय के अनुसार बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी ऐसे ही उग्र कार्यक्रम पूरे वर्ष आयोजित करेगी ताकि एक ओर प्रान्त निर्माण का मुद्दा आम आदमी तक पहुँच कर जनांदोलन का रूप ले सके दूसरी ओर सरकारों पर प्रान्त गठन हेतु आवश्यक दबाव बन सके।

शनिवार, 24 अक्टूबर 2009

पृथक बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए सम्पूर्ण क्रांति अभियान

महोबा। पृथक राज्य निर्माण के लिए राजनीतिक दलों और नेताओं का भरोसा छोड़ जनता को खुद आगे आना होगा। बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी इसके लिए रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिन 19 नवंबर से वृहद जन जागरूकता अभियान चलायेगी। इसमें रैली, नुक्कड़ सभा, प्रदर्शन व चक्का जाम जैसे आयोजन किये जायेंगे। राज्य निर्माण की इस मांग को समग्र जनक्रांति के रूप में विकसित करने को जिला मुख्यालयों से गांव स्तर पर चेतना जागरण कार्यक्रम किये जायेंगे। यह जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए दी। उन्होंने कहा कांग्रेस और बसपा बुंदेलखंड राज्य निर्माण के नाम पर खोखली घोषणाएं कर जनता को गुमराह कर रही है। बीते सप्ताह राहुल गांधी से हुई भेंट में उन्होंने वैचारिक तौर पर इसका पुरजोर समर्थन किया। वह अपनी व्यक्तिगत हैसियत का प्रयोग करें तो पृथक राज्य बनना बहुत कठिन नहीं है। इस संबंध में कांग्रेस व बसपा की नियत पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि जनता निहित स्वार्थ की राजनीति करने वाले दलों के भरोसे रही तो पृथक राज्य का सपना साकार होना मुश्किल हो जायेगा। बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी का एक सूत्रीय एजेंडा पृथक राज्य निर्माण का है। आंदोलन को गति देने के लिए रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिन 19 नवंबर से वृहद जन जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है। इसमें जिला मुख्यालयों से गांव स्तर तक चेतना जागरण अभियान चला आम आदमी को इससे जोड़ने की मुहिम चलाई जायेगी। आंदोलन को धार देने के लिये नुक्कड़ सभाएं, रैलियां व प्रदर्शन करने के साथ ही चक्का जाम भी किया जायेगा।

रविवार, 13 सितंबर 2009

बेतुकी बारिस से "बद से बदतर " हुआ बुंदेलखंड

महोबा। बुंदेलखंड में खेती पहले से ही चौपट है। अब इस बेतुकी बारिस ने खरीफ की बची खुची फसल को नष्ट प्राय कर दिया है। पांच वर्षों से सूखा झेल रहे बुंदेलखंड में इस साल बिना वर्षा के ही खरीफ की फसल बोयी गयी थी । फलस्वरूप फसल पहले से ही नाम मात्र की थी। अब जब खरीफ की फसल खेतों में तैयार खड़ी थी तब बेसमय ही एक हफ्ते तक लगातार बारिस हो जाने से खड़ी फसल सड़ गई। जिससे किसानो को जो थोडी बहुत आशा थी वो भी ख़त्म हो गई। हालाँकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिस से रबी की फसल अच्छी हो जायेगी,किन्तु रबी की फसल के लिए खाद-बीज का जुगाड़ तो खरीफ को बेच कर ही होता है। ऐसे में जबकि खरीफ पूरी तरह बर्बाद हो गयी है किसान रबी की मंहगी बुबाई का बंदोबस्त कहाँ से करेगा? यहाँ का लगभग हर किसान पहले से ही कर्जदार है इसलिए अब बैंक भी उन्हें कर्ज नहीं देंगे। अब किसान करें तो क्या? प्रकृति का कहर बुन्देलखंड पर बदस्तूर जारी है। किसानो के धैर्य की सीमा टूट रही है, इसलिए वो कोई भी नकारात्मक कदम भी उठा सकते हैं । यहाँ के क्षेत्रीय संगठन बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी ने सरकार से मांग की है की बुंदेलखंड के किसानों को रबी की फसल की बुबाई के लिए खाद और बीज आदि की व्यवस्था सरकारी स्तर पर करवाई जाये।

बुधवार, 2 सितंबर 2009

बुन्देलखंड के किसानो को सीधी सहायता मिले : संजय पाण्डेय

झाँसी । बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने यहाँ एक कार्यक्रम में कहा कि आज बुन्देलखण्ड के किसानो को सीधी और त्वरित सहायता की जरूरत है। सूखा राहत के नाम पर विभिन्न योजनाओ में जमकर बन्दर बाँट होता है , इसलिए पात्र किसानों को समय से और उचित मात्रा में राहत राशिः नही पहुँच पाती है। केन्द्र सरकार से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को पैकेज न देकर जिलाधिकारियों के माध्यम से किसानों को सीधी सहायता मुहैया करायी जाए। ये पहले ही सिद्ध हो चुका है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसी राहत राशियों का जमकर दुरूपयोग किया है।लिहाजा अब पुनरावृत्ति से बचा जाना चाहिए। दूसरी ओर पाण्डेय ने यह भी कहा कि सूखा राहत मिलने के नियम कानून इतने जटिल होते है कि आम आदमी उन्हें समझ नही पाता है , इसलिए ऐसे में वह जान ही नही पाता है कि उसे कितनी राशि मिलनी चाहिए , फलस्वरूप उसे जो भी मिलता है वह उतने से ही संतुष्टि कर लेता है। अतः राहत देने का फार्मूला आसान हो ।कहा कि बुन्देलखंड में सूखा पीड़ित किसानो द्वारा आत्म हत्याओं का सिलसिला शुरू हो चुका है इसलिए और मौतों का इंतजार न करते हुए सरकार को जल्द ही सहायता की सोचनी चाहिए। श्री पाण्डेय ने कहा कि वैसे तो इस वर्ष पूरे भारत में ही सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है किंतु बुन्देलखंड कि स्तिथि इसलिए हटकर है क्योंकि यहाँ सूखा का पहला साल नही बल्कि पिछले पॉँच वर्षों से यही हालत है। इसलिए सरकार को बुन्देलखंड के किसानो के बारे में प्राथमिकता से सोचना होगा। राहत प्रदान करते समय भी बुन्देलखंड के किसानो को देश के अन्य हिस्सों के किसानो से तुलना न करते हुए विशेष अधिभार दिया जाए।बताया कि बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी यहाँ के किसानों की समस्याओं को लेकर विशाल आन्दोलन शुरू करने जा रही है.

शनिवार, 1 अगस्त 2009

बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण बनना उचित : संजय पाण्डेय

बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने बुंदेलखंड के समुचित विकास के लिए केंद्र द्वारा बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण बनाये जाने के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के विकास के लिए केंद्र से मिलने वाले पैसे का राज्य सरकारे खासा दुरूपयोग करती हैं. इसलिए बुंदेलखंड क्षेत्र का विकास तभी हो सकता है जब यहाँ पर विकास कार्य केंद्र की निगरानी में हो. उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के विकास के प्रति गंभीरता दिखने पर बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के सभी कार्यकर्ता बुंदेलखंड वासियों कि तरफ से राहुल गाँधी तथा केंद्र सरकार का धन्यवाद देते है. संजय पाण्डेय के अनुसार बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण बन जाना बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए मील का पत्थर साबित होगा.
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